कोलकाता। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार राज्य के आईपीएस अधिकारी और कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार समय पर गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने में विफल रहे हैं। बुधवार रात चुनाव आयोग ने उन्हें राज्य अपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के एडीजी के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया था।
उन्हें गुरुवार सुबह 10:00 बजे गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने को कहा गया था लेकिन उन्होंने दोपहर 12:00 बजे तक ना तो गृह मंत्रालय में रिपोर्ट की है और ना ही देरी होने संबंधी किसी तरह की कोई सूचना दी है।
राजीव कुमार कोलकाता से दिल्ली रवाना हुए भी हैं, या नहीं इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उनसे संपर्क करने की सारी कोशिशें भी विफल रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि कुमार ने न तो ज्वाइन किया और न ही कोई जानकारी दी है।
उल्लेखनीय है कि कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा करोड़ों रुपये के शारदा चिट फंड घोटाले के संबंध में पूछताछ हुई है। उनसे पूछताछ करने के लिए उनके आवास पर सीबीआई के पहुंचने के बाद इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए गत तीन फरवरी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फरवरी में धरना दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 9 मई से 13 मई तक उनसे लगातार पांच दिनों तक पूछताछ हुई थी। अब सीबीआई ने उनकी गिरफ्तारी की मांग पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई है, जिस पर लगातार सुनवाई चल रही है।
इस बीच चुनाव आयोग के निर्देशानुसार राज्य सरकार ने उन्हें कोलकाता पुलिस आयुक्त के पद से हटा दिया था और राज्य सीआईडी में एडीजी के पद पर भेजा गया था। आरोप है कि सीआईडी में उनकी तैनाती के बाद भारतीय जनता पार्टी की घाटाल लोकसभा केंद्र से उम्मीदवार भारती घोष के खिलाफ गैर जरूरी तरीके से सीआईडी की सक्रियता बढ़ी थी और राज्य मेंं अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ भी सीआईडी अति सक्रिय हो गई थी।
इसके खिलाफ भाजपा ने चुनाव आयोग में राजीव कुमार को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। बुधवार को जब आयोग ने राज्य के गृह सचिव अत्री भट्टाचार्य को हटाने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही राजीव को भी उनके पद सेे हटाकर गृह मंत्रालय में अटैच कर दिया था। उन्हें गुरुवार सुबह गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करनी थी लेकिन उन्होंने ना तो रिपोर्ट की और ना ही किसी तरह की कोई सूचना चुनाव आयोग अथवा गृह मंत्रालय को दी। इसके बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजीव कुमार के इस कदम के बाद एक बार फिर सबकी निगाहें बंगाल की ओर टिक गई है।
