- योग और श्रीमद्भागवत कथा के संयुक्त आयोजन का भव्य शुभारंभ
सनलाइट, कोलकाता। श्री कृष्ण योग ट्रस्ट और कोलकाता पुष्करणा समाज द्वारा आयोजित योग और श्रीमद्भागवत कथा के संयुक्त आयोजन का आज सत्संग भवन प्रांगण में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भव्य शुभारंभ हुआ।

रामायण जीना सिखाती है और भागवत मरना
भागवताचार्य जयप्रकाश शास्त्री ने भागवत का माहात्म्य बताते हुए कहा कि रामायण जीना सिखाती है और भागवत मरना। उन्होंने बताया कि हम कितने वर्ष जियें इसका कोई महत्त्व नहीं, कैसे जियें इसका महत्त्व है। मरें तो इस प्रकार जीवन जी के मरें कि जन्म मरण का चक्कर छुट जाए।
गंगा का प्राकट्य
गंगा के प्राकट्य के बारे में बताते हुए भागवताचार्य ने बताया कि एक गंगा नारायण के चरणों से प्राकट्य हुई जिसे भगवान शिव ने अपने जटाओं में धारण किया और भगीरथ के निवेदन पर अपनी जटाओं से निकाला जिसे भगीरथ गंगा कहते है जो तन शुद्ध करती है। और दूसरी गंगा जो नारायण के मुख से निकली जिसे शिव ने अपने ह्रदय में धारण किया और पार्वती के कहने पर उसे प्रकट किया उसे भागवती कथा गंगा कहते हैं जो मन को शुद्ध करती है।
भागवताचार्य ने दोनों में अंतर बताते हुए कहा कि भगीरथ गंगा के लिए आपको स्वास्थ्य, समय, संपति और श्रद्धा के साथ जाना पड़ता है परंतु भगवतकथा गंगा तो श्रद्धा और भक्ति से बुलाने वाले के यहाँ स्वयं बहती बहती आ जाती है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण योग ट्रस्ट ने श्रद्धापूर्वक, प्रेमपूर्वक चाहा कि भगवत कथा गंगा 25 जुलाई से सत्संग भवन के प्रांगण में बहनी चाहिए तो भगवत कथा गंगा स्वयं बहते बहते यहाँ आ गयी।
योगाचार्य राजेश व्यास के सानिध्य में 30 जुलाई तक सुबह 7 बजे से 8.15 तक योग सत्र
इस आयोजन के दूसरे दिन से योगाचार्य राजेश व्यास के सानिध्य में 30 जुलाई तक सुबह 7 बजे से 8.15 तक योग सत्र भी चलेगा। आयोजन के संयोजन और जन संपर्क का दायित्व निभा रहे मुकेश व्यास ने बताया कि योग शिविर में वकील, स्काउट के छात्र आदि का समूह अलग अलग दिनों में शामिल होगा।
आयोजन के उद्घाटन समारोह में समाजसेवी लक्ष्मी कांत तिवारी, कोलकाता पुष्करणा समाज के अध्यक्ष सुशील पुरोहित, चंदा खरवार, आनंद खरवार, राजेश ओझा, आदि उपस्थित थे।

संयुक्त आयोजन के उद्घाटन समारोह को सफल बनाने में आयोजन समिति के मयंक व्यास, हसमुख श्रीमाली, मनोज बोहरा, अजय सिंह, सुशील बांठिया आदि सक्रिय थे।
