Supreme Court on West Bengal SIR – एसआईआर मामले पर सुनवाई करते हुए आज चीफ जस्टिस ने कहा, यह एक दुर्भाग्यपूर्ण ब्लेम गेम है।
Supreme Court on West Bengal SIR
चीफ जस्टिस ने कहा कि राज्य की चुनी हुई सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच आपसी भरोसे की कमी है।
चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार की भूमिका पर नाराज़गी जताते हुए कहा, 9 फरवरी को निर्देश देने के बाद भी कोई ऑफिसर क्यों नहीं दिए गए?
जवाब में, राज्य के वकील सिब्बल ने कहा, “हमने ग्रुप B ऑफिसर दिए हैं। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा, SD लेवल के ऑफिसर कहां हैं?
सिब्बल ने कहा कि उन्हें माइक्रो ऑब्जर्वर के लिए दिया गया है। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, “ERO के पद के लिए ऑफिसर ढूंढे जा रहे हैं। हम बहुत निराश हैं। हमें राज्य सरकार से सहयोग की उम्मीद थी।
राज्य की एक और वकील ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सिर्फ 69 SDO रैंक के ऑफिसर हैं। यह सुनकर चीफ जस्टिस ने कहा, जो लोग इस ERO पद पर होंगे, उन्हें ज्यूडिशियरी की तरह काम करना होगा।
उन्हें जज की तरह तय करना होगा कि किसी का नाम होगा या नहीं। यह किसी क्लर्क का काम नहीं है। अगर आपके पास काफी ऑफिसर नहीं हैं, तो आप कमीशन से अपने ऑफिसर लाने के लिए कह सकते हैं।
चीफ जस्टिस ने भाषा सम्बंधित परेशानी को लेकर कहा कि इस पर सोचा जा सकता है कि क्या पश्चिम बंगाल में SIR प्रोसेस को देखने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट से कोई ज्यूडिशियल ऑफिसर अपॉइंट किया जा सकता है।
वह ऑफिसर कमीशन और सरकार दोनों के साथ कोऑपरेट करेगा। कपिल सिब्बल ने कहा, कोई प्रॉब्लम नहीं है। एक ज्यूडिशियल ऑफिसर अपॉइंट किया जा सकता है।
कमीशन के वकील ने कहा, “हमें ऐसी प्रॉब्लम सिर्फ़ पश्चिम बंगाल में आ रही है। किसी दूसरे राज्य में ऐसी प्रॉब्लम नहीं है। पश्चिम बंगाल में नाम हटाने का रेट काफ़ी कम है।”
