कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की रथयात्रा एक बार फिर कानूनी दाव-पेंच में फंसती नजर आ रही है। शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच ने रथयात्रा पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी कर दिया। रथयात्रा की अनुमति के खिलाफ राज्य सरकार ने एक याचिका दायर की थी, जिस पर मुख्य न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता और न्यायमूर्ति संपा सरकार की खंडपीठ में सुनवाई हुई। उसके बाद खंडपीठ ने रथ यात्राओं को दी गई अनुमति पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी कर दिया। अदालत में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता किशोर दत्त और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि राज्य के 23 जिलों के पुलिस अधीक्षकों और खुफिया पुलिस के अलावा 36 जगहों से ऐसी रिपोर्ट मिली है कि भारतीय जनता पार्टी की रथयात्राओं के दौरान सांप्रदायिक संघर्ष की घटनाएं घट सकती हैं। ऐसे में भाजपा की रथयात्रा को अनुमति देना राज्य के हालात को बिगाड़ने जैसा होगा।
उधर भारतीय जनता पार्टी के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि कानून व्यवस्था को संभालना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसकी आड़ में किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रचार-प्रसार से नहीं रोका जा सकता है। पार्टी के केंद्रीय नेता राज्य में प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं। इसके लिए बस के जरिए यात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। इसे रोकने का कोई औचित्य नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने भारतीय जनता पार्टी की रथ यात्राओं पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि एकल पीठ में ही मामले की सुनवाई पूरी होगी। खंडपीठ ने एकल पीठ को निर्देश दिया है कि राज्य सरकार की 36 सीलबंद रिपोर्ट को देखने के बाद एकल पीठ इस पर नए सिरे से विचार कर अंतिम फैसला ले। तब तक भारतीय जनता पार्टी की रथ यात्रा पर स्थगन आदेश जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी की रथयात्राओं को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अनुमति दे दी थी। न्यायमूर्ति तपोव्रत चक्रवर्ती ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी का पक्ष सुनने के बाद रथ यात्राओं को सशर्त अनुमति दी। अदालत से अनुमति मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से बताया गया था कि उनकी पहली रथ यात्रा 22 दिसंबर को कूचबिहार से दूसरी रथ यात्रा 24 दिसंबर को गंगासागर से और तीसरी रथ यात्रा 26 दिसंबर को बीरभूम जिले के तारापीठ से निकाली जाएगी लेकिन उससे पहले राज्य सरकार की तरफ से एकल पीठ के फैसले को डिविजन बेंच में चुनौती दे दी गई।
उसके बाद भाजपा की ओर से कुछ ऐसा ही संकेत दिया गया कि वह अब सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।
न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि पार्टी के कानून विशेषज्ञ इस मुद्दे पर बैठक कर यह फैसला लेंगे कि भाजपा इसे एक बार फिर एकल पीठ में ले जाना स्वीकार करेगी या इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई जाएगी।
