‘केशरीनाथ त्रिपाठी: एकल काव्य पाठ’ कार्यक्रम
कोलकाता। श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय एवं फ्रेन्ड्स ऑफ कोलकाता के तत्वावधान में रविवार को ‘केशरीनाथ त्रिपाठी: एकल काव्य पाठ’ कार्यक्रम कलामंदिर प्रेक्षागृह में आयोजित किया गया। इस दौरान राज्यपाल ने अपनी कई कविताएं पढ़ी, जिसमें अपने परिचय के तौर पर उन्होंने पढ़ा कि ‘मेरा परिचय क्या बोलूं, मोटी पुस्तक कैसे, कितना खोलूं।’ उन्होंने कहा कि कोलकाता की साहित्य प्रेमी जनता ने मुझे प्रेरित-प्रभावित किया है। इसी बंगभूमि में मैंने हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी तथा उर्दू में भी काव्य सृजन किया। बांग्ला में भी मेरी कुछ रचनाओं का अनुवाद हुआ है। कुमारसभा पुस्तकालय तथा आचार्य विष्णुकांत शास्त्री से मेरा पुराना संबंध रहा है। मैं पहली बार इस तरह एकल काव्य पाठ कर रहा हूं।
समारोह के अध्यक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरिधर मालवीय ने कहा कि केसरीनाथ के व्यक्तित्व में त्रिवेणी का समावेश है। वे कुशल विधिवेत्ता, लोकप्रिय राजनेता तथा संवेदनशील कवि के रूप में देश-विदेश में सम्मानित हैं।
मुख्य अतिथि उद्योगपति सज्जन कुमार भजनका ने कहा कि राज्यपाल त्रिपाठी ने अपने कोलकाता प्रवास में सभी सामाजिक संस्थओं को स्नेह प्रदान कर हमें नई ऊर्जा दी है। प्रख्यात कवि व गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र ने त्रिपाठी की काव्य यात्रा के विविध सोपानों का परिचय देकर एकल काव्य पाठ की भावभूमि प्रस्तुत की।
प्रारंभ में लोकप्रिय गायक ओमप्रकाश मिश्र ने महामहिम केसरीनाथ त्रिपाठी रचित सरस्वती वन्दना, क्षितिज के उस पार देखें क्यों अभी हम, अभी तो इस पार का जीवन बहुत अवशेष है तथा जय शंकर, जय जय शिवशंकर प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ प्रेम शंकर त्रिपाठी ने 25 वर्ष पूर्व पुस्तकालय के तत्वावधान में संपन्न कवि अटल बिहारी वाजपेयी के एकल काव्य पाठ का भावपूर्ण स्मरण किया तथा केसरीनाथ त्रिपाठी के साहित्यिक व्यक्तित्व की चर्चा की। वरिष्ठ आयकर सलाहकार सज्जनकुमार तुलस्यान एवं पुस्तकालय के मंत्री महावीर प्रसाद बजाज तथा राज्यपाल के मुख्य सचिव सतीश तिवारी समेत कई गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम में मौजूद रहे।
