Narsingh Jayanti – लिलुआ का गौरव; ब्रह्म बगीचा नृसिंह महोत्सव 30 को

सामाजिक

Narsingh Jayanti – आस्था, परंपरा और बीकानेरी संस्कृति का अनुपम संगम लिलुआ की धरा पर आयोजित होने वाला नृसिंह जयंती महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प और अटूट श्रद्धा की एक गौरवशाली गाथा है।

पी शीतल हर्ष

Narsingh Jayanti

पिछले 17 वर्षों से निरंतर जारी यह आयोजन आज बीकानेरी समाज की पहचान बन चुका है। इस महोत्सव की नींव 17 वर्ष पूर्व स्वर्गीय नारायण दास हर्ष, स्वर्गीय हनुमान व्यास, ग्वाल दास व्यास, छोटू लाल पुरोहित और पी शीतल हर्ष के साझा विचार से पड़ी थी।

स्वर्गीय नारायण दास हर्ष

बीकानेरी संस्कारों को जीवंत रखने के लिए ‘पुष्करणा ब्रह्म बगीचा’ को इस उत्सव का केंद्र बनाया गया। पिछले 16 वर्षों से पी शीतल हर्ष इस आयोजन के संयोजन की जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।

​इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे लिलुआ के प्रबुद्धजनों का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग रहता है। इसमें घनश्याम व्यास, गणेश व्यास, लक्ष्मी नारायण व्यास, बसंत पुरोहित, मनोज व्यास और लिलुआ महिला मंडल की सखियों का निस्वार्थ सहयोग इस मेले को प्रतिवर्ष नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

फाइल फोटो – तन्नी हर्ष, हिरण्यकश्यप को तैयार करते हुए

​महोत्सव के मंच पर अब तक नृसिंह हर्ष, उमेश व्यास, राहुल पुरोहित और किशन पुरोहित ने नृसिंह स्वरूप धारण कर अपनी भक्ति का प्रदर्शन किया है।

वहीं, पुरुषोत्तम जोशी (फरसिया) ने एक अद्भुत कीर्तिमान स्थापित किया है—वे प्रथम वर्ष से लेकर आज तक अनवरत हिरण्यकश्यप का पात्र निभा रहे हैं।

विशेष रूप से बालक जिगर व्यास का उल्लेख अत्यंत आवश्यक है, जिन्होंने अपनी छोटी सी आयु में अद्भुत साहस और कला का परिचय दिया।

मात्र 3 वर्ष की आयु में भक्त प्रह्लाद का वेश धारण करने से लेकर 12 वर्ष की आयु में दैत्य का रूप धरने तक, उनकी प्रतिभा ने सभी का मन मोह लिया है।

नरसिंह महोत्सव की पूर्णाहुति पर आयोजित होने वाला ‘प्रसाद’ इस उत्सव का एक मुख्य आकर्षण है। पूरी तरह से शुद्ध राजस्थानी शैली में तैयार प्रसाद साक्षात् राजस्थान की माटी की खुशबू का अनुभव लिलुआ में कराता है।

बड़ाबाजार से लिलुआ तक फैला यह महोत्सव बीकानेरी समाज की एकता, कला और विश्वास का प्रतीक है।

ढोल-ताशों की गूँज और “नरसिंह भगवान की जय” के उद्घोष के साथ जब नरसिंह देव का अवतार होता है, तो हावड़ा का यह हिस्सा पूरी तरह राजस्थानी रंग में रंगा नजर आता है।

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