Jagannath Snana Yatra – ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्ति, परंपरा और हर्षोल्लास के बीच मायापुर इस्कॉन के राजापुर जगन्नाथ मंदिर में श्री श्री जगन्नाथ देव, बलदेव और सुभद्रा महारानी का वार्षिक स्नान यात्रा महोत्सव संपन्न हुआ।
Jagannath Snana Yatra
सुबह से ही मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी, जिससे पूरा इलाका उत्सव के रंग में डूब गया।
हरिनाम संकीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच महाअभिषेक का अनुष्ठान पूरा किया गया।
गंगाजल और दूध-शहद से हुआ महाअभिषेक – शास्त्रीय नियमों के अनुसार, पवित्र गंगाजल, चंदन, दूध, दही, शहद, घी, नारियल पानी और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा जी को स्नान कराया गया।
इस विशेष अभिषेक को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। निर्धारित नियमों का पालन करते हुए कई श्रद्धालुओं ने भी अभिषेक सेवा में भाग लिया।
15 दिनों के लिए ‘अनासर’ में रहेंगे भगवान – स्नान यात्रा जगन्नाथ संस्कृति के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक है।
Jagannath Snana Yatra – पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न के काल से ही इस उत्सव की शुरुआत हुई थी। माना जाता है कि इस महास्नान के बाद अत्यधिक जल स्नान के कारण भगवान बीमार पड़ जाते हैं।
इसलिए, स्नान के बाद उन्हें विश्राम के लिए ‘अनासर’ (गुप्त विश्राम कक्ष) में ले जाया जाता है। अगले पखवाड़े (15 दिनों) तक आम भक्तों के लिए भगवान के दर्शन बंद रहेंगे।
Jagannath Snana Yatra – इसके बाद ‘नवयौवन दर्शन’ के माध्यम से भगवान पुनः दर्शन देंगे और रथ पर सवार होंगे।
स्नान प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान को उनके पारंपरिक ‘गजवेश’ (हाथी रूप) में सजाया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
भगवान के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में भक्त घंटों कतारों में इंतजार करते दिखे। दिनभर मंदिर में हरिनाम संकीर्तन, गीता पाठ, विशेष भोग निवेद्य और महाप्रसाद वितरण सहित विभिन्न वैष्णव धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा।
