Ashadh Maas – आषाढ़ मास 30 जून 2026 से प्रारंभ हुआ है जो 29 जुलाई 2026 तक रहेगा। इस अवधि में कई महत्वपूर्ण ग्रह-योग निर्मित हो रहे हैं।
Ashadh Maas
जिनका प्रभाव देश-दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों पर देखने को मिल सकता है।
Ashadh Maas
ज्योतिष प्रभाकर डॉ. राकेश व्यास के बताया कि इस बार आषाढ़ मास में पांच मंगलवार पड़ रहे हैं तथा मंगलवारी अमावस्या भी है।
ज्योतिष प्रभाकर व्यास ने बताया कि 26 जुलाई 2026 से शनि देव वक्री हो जाएंगे। इसी अवधि में मंगल और शनि के मध्य दृष्टि संबंध स्थापित होगा, जिससे तनाव, संघर्ष, प्रशासनिक चुनौतियों तथा आकस्मिक घटनाओं के योग बन सकते हैं।
इसके प्रभाव से किसी प्रमुख राजनीतिक नेता के पद त्यागने, अपदस्थ होने, स्वास्थ्य संबंधी चिंता उत्पन्न होने अथवा किसी अप्रिय राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना बन सकती है।
Ashadh Maas ,- साथ ही देश के किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन अथवा शासन-प्रशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
सामाजिक दृष्टि से यह समय संवेदनशील रहने की संभावना व्यक्त की गई है। ग्रहों की स्थिति अग्निकांड, हिंसक घटनाओं, उपद्रव, सांप्रदायिक तनाव, विस्फोट अथवा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों की ओर संकेत करती है।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर डॉ. व्यास ने कहा कि ग्रह-स्थितियां विशेष रूप से पाकिस्तान, ईरान, कतर, सीरिया तथा गाजा क्षेत्र सहित कुछ इस्लामी देशों में तनावपूर्ण वातावरण एवं युद्ध जैसी परिस्थितियों की संभावना का संकेत देती हैं।
रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े मामलों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। साथ ही हवाई अड्डों, सामरिक प्रतिष्ठानों अथवा सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
आर्थिक क्षेत्र में भी ग्रहों के प्रभाव को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2026 को शुक्र का सिंह राशि में केतु के साथ युति करना तथा उस पर मंगल की दृष्टि पड़ना बाजार में अस्थिरता का संकेत देता है।
इसके परिणामस्वरूप सोना, तांबा तथा विभिन्न प्रकार के अनाजों के मूल्यों में वृद्धि देखने को मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना के कारण उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्यान्न आपूर्ति और कीमतों पर भी असर पड़ने के संकेत हैं।
ज्योतिषाचार्य व्यास के अनुसार Ashadh Maas के प्रथम पक्ष में देश की आर्थिक गतिविधियों पर कुछ दबाव दिखाई दे सकता है।
वित्तीय संस्थानों एवं बैंकिंग क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। संसद में किसी महत्वपूर्ण विधेयक के पारित न हो पाने जैसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं हालांकि इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और संबंधों में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं।
द्वितीय पक्ष, अपेक्षाकृत अलग परिणाम देने वाला माना जा रहा है। डॉ. व्यास के अनुसार इस अवधि में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होने की संभावना है।
