Sawan Maas – सावन मास इस वर्ष 30 जुलाई से प्रारंभ होगा जो 28 अगस्त तक रहेगा। भगवान शिव की आराधना को समर्पित इस पावन मास में इस बार पांच गुरुवार और पांच शुक्रवार का संयोग बन रहा है।
Sawan Maas
धार्मिक दृष्टि से यह मास विशेष पुण्यदायी माना जाता है, वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस अवधि में बनने वाले ग्रह-गोचर कई महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं।
ज्योतिष प्रभाकर डॉ. राकेश व्यास के अनुसार सावन मास के प्रारंभ में 9 अगस्त तक देवगुरु बृहस्पति अस्त रहेंगे। गुरु के अस्त होने के कारण मौसम में असंतुलन देखने को मिल सकता है।
देश के कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति बनेगी, जबकि कुछ स्थानों पर सामान्य से काफी कम वर्षा होने की संभावना है।
इस असमान वर्षा के कारण कृषि, जल प्रबंधन और जनजीवन प्रभावित हो सकता है। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे जैसी परिस्थितियां बनने के संकेत हैं।
Sawan Maas – डॉ. व्यास के अनुसार ग्रहों की वर्तमान स्थिति प्राकृतिक आपदाओं की आशंका भी व्यक्त कर रही है।
इस अवधि में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन अथवा अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण जन-धन की हानि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे समय में प्रशासन और आमजन दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य की बात करें तो ग्रहों की स्थिति विश्व स्तर पर आर्थिक चुनौतियों की ओर भी संकेत कर रही है।
कई देशों में मंदी, बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार और निवेश पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
इसका अप्रत्यक्ष असर भारत सहित अन्य विकासशील देशों पर भी देखने को मिल सकता है। डॉ. व्यास के अनुसार भारत की पश्चिमी सीमाओं पर भी विशेष सतर्कता की आवश्यकता रहेगी।
Sawan Maas – ग्रह योग सीमा क्षेत्रों में घुसपैठ, विस्फोटक घटनाओं अथवा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि यह केवल ज्योतिषीय संभावनाएं हैं, जिनका उद्देश्य सावधानी और जागरूकता का संदेश देना है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह समय संवेदनशील माना जा सकता है।
ग्रहों की स्थिति के कारण लोकसभा, राज्यसभा अथवा किसी राज्य की विधानसभा में मतभेद, तनाव और तीखी राजनीतिक बहस की स्थिति बन सकती है।
Sawan Maas – सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने से महत्वपूर्ण निर्णयों में विलंब होने की संभावना भी रहेगी।
विदेश नीति के संदर्भ में डॉ. व्यास का मानना है कि इस अवधि में भारत को अन्य देशों से अपेक्षित सहयोग कम मिल सकता है।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और कूटनीतिक निर्णय स्वयं की रणनीति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लेने पड़ सकते हैं।
हालांकि आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित रहने के संकेत हैं। घरेलू अर्थव्यवस्था सामान्य गति से आगे बढ़ सकती है और बड़े आर्थिक संकट की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
फिर भी वैश्विक परिस्थितियों के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। धार्मिक दृष्टि से इस अवधि में भारत में कोई ग्रहण नहीं पड़ेगा, जिससे शिवभक्त बिना किसी ग्रहण संबंधी व्यवधान के व्रत, पूजन, रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकेंगे।
ज्योतिष प्रभाकर डॉ. राकेश व्यास का कहना है कि Sawan Maas भगवान शिव की उपासना, संयम, सेवा और सकारात्मक सोच का समय है।
ग्रहों के संभावित प्रभावों के बीच यदि व्यक्ति ईश्वर में आस्था रखकर सत्कर्म, दान-पुण्य और शिव आराधना करता है तो मानसिक बल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
