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तृणमूल नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव बना रहे सीबीआई और ईडी अधिकारी : गौतम कुंडू

कोलकाता

कोलकाता। वर्ष 2014 से चिटफंड मामलों की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ रोजवैली समूह के मालिक गौतम कुंडू ने बड़ा आरोप लगाया है। कुंडू ने बैंकशाल कोर्ट के विशेष न्यायालय में न्यायाधीश के नाम एक चिट्ठी लिखी है जिसमें दावा किया है कि पूछताछ के नाम पर केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों उन पर सत्तारूढ़ पार्टी के कई शीर्ष नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। यहां तक कि कई बार दबाव बनाकर नाम लेने के लिए मजबूर कर चुके हैं।

दरअसल रोजवैली चिटफंड मामले में सीबीआई और ईडी की टीम प्रेसिडेंसी जेल में जाकर गौतम कुंडू से कई बार पूछताछ कर चुकी है। अब एक चिट्ठी सामने आई है। यह 26 जून को बैंकशाल कोर्ट के विशेष सीबीआई जज को लिखी गई है। 6 पन्ने की इस चिट्ठी में गौतम ने दावा किया है कि गत 18 से 21 जून के बीच सीबीआई के जांच अधिकारियों ने उनसे जेल में जाकर पूछताछ की थी। पूछताछ के समय सीबीआई अधिकारियों ने सत्तारूढ़ पार्टी के कई शीर्ष नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव बनाया था। अधिकारियों ने कहा था कि रोजवैली समूह से रुपये के लेनदेन के मामले में कुछ खास नेताओं का नाम लेना होगा।

गौतम ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि जिन राजनीतिक नेताओं का नाम लेने के लिए सीबीआई दबाव बना रही है उनके साथ मेरा किसी तरह का कोई आर्थिक लेन-देन नहीं था। हां व्यक्तिगत परिचय जरूर था लेकिन उसका चिटफंड के कारोबार से कोई लेना देना नहीं। अपनी चिट्ठी में गौतम ने कहा है कि सीबीआई अधिकारियों को भी उन्होंने अपने व्यक्तिगत संबंध की बातें बताई थी लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन नेताओं का नाम मामले में शामिल करने के लिए जबरदस्ती दबाव बनाया।

उल्लेखनीय है कि रोजवैली चिटफंड मामले में संदिग्ध संलिप्तता के आरोप में तृणमूल के दो सांसद तापस पाल और सुदीप बनर्जी को जांच एजेंसी पहले गिरफ्तार कर चुकी है। फिलहाल वे दोनों स्वास्थ्य आधार पर जमानत पर हैं। करीब एक साल तक ये लोग भुवनेश्वर की जेल में रह चुके हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी फिल्म निर्माता श्रीकांत मोहता भुवनेश्वर जेल में हैं। गौतम कुंडू फिलहाल प्रेसिडेंसी जेल में हैं और जेल से कोई भी कैदी न्यायालय को किसी भी तरह की शिकायत कर सकता है। इसके लिए प्रत्येक जेल में प्रिजनर्स पिटिशन नाम से अलग कागज होती है। वहां हाथ से चिट्ठी लिखकर कैदी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ऐसे ही प्रिजनर्स पेटीशन नाम की चिट्ठी के जरिए गौतम कुंड ने यह आरोप लगाया है। अपनी चिट्ठी में गौतम ने न्यायाधीश से अपनी मां के इलाज की भी अर्जी लगाई है। उन्होंने कहा है कि या तो दैनिक तौर पर मैं अपनी मां की जरूरत की चीजें भेज सकूं इसकी व्यवस्था की जाए या मेरी मां के लिए इच्छा मृत्यू की अनुमति दी जाए। सीबीआई सूत्रों के हवाले से खबर है कि एक बार फिर जांच अधिकारी जेल में जाकर उनसे पूछताछ करने की तैयारी में जुटे हैं।

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