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दिल्ली की सत्ता होगा ममता का लक्ष्य, बंगाल फतह के लिए लड़ेगी भाजपा

बंगाल

कोलकाता। पूरे देश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में यह लोकसभा चुनाव बाकी चुनावों की तुलना में अधिक दिलचस्प होने वाला है। उत्तर भारत के कई बड़े राज्यों में भाजपा का जनाधार पिछले विधानसभा चुनाव में घटा है जिसकी भरपाई करने के लिए पार्टी ने पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल की लोकसभा सीटों को टारगेट किया है। जबकि दूसरी ओर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की सभी 42 सीटों पर जीत दर्ज करने का लक्ष्य तय किया है ताकि राष्ट्रीय राजनीति में वह सबसे बड़ा नेता बन कर उभर सकें और अगर नई सरकार बनी तो उसमें उनकी बड़ी भूमिका हो सके।

भाजपा का लक्ष्य है बंगाल

पिछले साल संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भाजपा ने राज्य भर में न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस को टक्कर दी थी बल्कि कई जगहों पर जीत दर्ज की थी। इससे राज्य में पार्टी का मनोबल बढ़ा हुआ है और लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को पटखनी देने की तैयारी भाजपा कर चुकी है। इसके लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन जनसभाओं को संबोधित किया है। कुल मिलाकर कहा जाए तो भाजपा वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बंगाल फतह के लिए लड़ेगी जबकि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह चुनाव राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी को विपक्ष का सबसे बड़ा नेता बनाकर उभारने का होगा।

माकपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन के आसार

इन दोनों पार्टियों के अलावा राज्य की दो अन्य पार्टियां माकपा और कांग्रेस भी मुकाबले में कहीं पीछे नजर नहीं आएंगी क्योंकि चुनाव पूर्व दोनों के बीच गठबंधन के आसार हैं और अगर माकपा तथा कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर राज्य में मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा। ऐसे में बंगाल में लोकसभा चुनाव के इस बार दिलचस्प मुकाबले के आसार हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 सीटों में से तृणमूल को 34, कांग्रेस को 4, और सीपीएम-भाजपा को दो-दो सीटें मिली थीं।

भाजपा का मुद्दा चिटफंड, घुसपैठ, राष्ट्रवाद होगा 

पाकिस्तान में आतंकवादियों पर एक तरफ जब वायु सेना ने हवाई हमले किए तो दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इस हवाई हमले की सफलता पर ही सवाल उठाया था जिससे राज्य भर में लोगों में नाराजगी की लहर थी। इसके चंद दिनों बाद ही चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के कारण निश्चित तौर पर यह मुद्दा राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा रहने वाला है। इसके अलावा बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए राज्य में असम की तर्ज पर एनआरसी लागू करने का भाजपा का दावा भी एक मुद्दा रहने वाला है। इसके अलावा अरबों रुपये के चिटफंड घोटाला और घोटालेबाजों को बचाने के लिए ममता बनर्जी का मजबूती से खड़ा होना भी लोगों के बीच एक बड़ा मुद्दा है। हाल ही में कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची सीबीआई के साथ बदसलूकी और राजीव कुमार के समर्थन में ममता बनर्जी का धरने पर बैठना भी उनके खिलाफ गया था, लोकसभा चुनाव में यह भी एक मुद्दा होगा जिसे भाजपा समेत अन्य विपक्षी पार्टियां भुनानी चाहेंगी।

ममता बोलेंगी नोटबंदी और जीएसटी को लेकर सरकार पर हमला

इधर केंद्र की भाजपा सरकार पर हमला करने के लिए ममता बनर्जी ने लगातार नोटबंदी और जीएसटी को लेकर मोदी सरकार पर शुरू से ही हमलावर रही हैं। ममता इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाती रही हैं। भाजपा और कांग्रेस बेरोजगारी को लेकर ममता सरकार पर हमला करती रहती है। इन दोनों पार्टियों का आरोप है कि ममता सरकार रोजगार सृजन करने में विफल साबित हुई है। ममता बनर्जी कहती हैं कि उन्होंने दोनों समुदायों के लिए समान अधिकार दिए हैं। लेकिन भाजपा का आरोप है कि ममता ने वोट बैंक के लिए राष्ट्रवाद को पीछे रहकर घुसपैठिए बांग्लादेशियों के साथ-साथ अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के लिए एक धर्म विशेष का ही ध्यान रखा है जबकि दूसरे धर्म के लोगों के अधिकारों का हनन किया है।

ममता बनर्जी के महागठबंधन का होगा लिटमस टेस्ट

लोकसभा चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी देशभर की सभी क्षेत्रीय पार्टियों और अन्य छोटे-बड़े विपक्षी दलों को मिलाकर महागठबंधन अथवा तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद में जुटी रही हैं। यह लोकसभा चुनाव ममता बनर्जी की इस कोशिश का भी लिटमस टेस्ट होगा। वह अब राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने को बेताब हैं। जब गत 19 जनवरी को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में विपक्षी दलों की महारैली में वह तमाम नेताओं के साथ खड़ी थी, तब उनकी निगाहें दरअसल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थीं। ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन का चेहरा बनने की कोशिश में लगी हुई हैं। पीएम मोदी का वह सबसे मुखर विरोध कर रही हैं। हालांकि कांग्रेस ने ममता बनर्जी को बहुत अधिक महत्व नहीं दिया है और राहुल गांधी को ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर महागठबंधन का चेहरा बनाने की कोशिश की जा रही है।

राज्य में इन नेताओं पर लगेंगे दाव

इस लोकसभा चुनाव में पश्चिमी बंगाल में विभिन्न पार्टियों के कई बड़े चेहरों पर दांव लगेंगे। इसमें सत्तारूढ़ तृणमूल में ममता बनर्जी सबसे लोकप्रिय चेहरे के रूप में नजर आती हैं। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, शिक्षा और संसदीय कार्य पार्थ चटर्जी, राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा डेरेक ओ ब्रायन, राज्य के परिवहन और पर्यावरण मंत्री शुभेन्दु अधिकारी, सांसद सुदीप बनर्जी पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में से हैं।
भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, मुकुल रॉय, बाबुल सुप्रियो, रूपा गांगुली और राहुल सिन्हा जैसे नेताओं पर दाव लगाए जाएंगे।
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर चौधरी और प्रदीप भट्टाचार्य जैसे शीर्ष नेताओं पर नजर रहेगी। माकपा में सूर्यकांत मिश्रा, मोहम्मद सलीम, विमान बोस जैसे शीर्ष नेता लोकसभा चुनाव में बड़े चेहरे होंगे।

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