कल्पवृक्ष से भी श्रेष्ठ है भागवत- भागवताचार्य जय प्रकाश शास्त्री

सामाजिक
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सनलाइट, कोलकता। कोलकाता के सत्संग भवन में चल रहे योग एवं श्रीमद्भागवत कथा के संयुक्त आयोजन के दूसरे दिन भागवताचार्य जय प्रकाश शास्त्री ने भागवत को कल्पवृक्ष से भी श्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि कल्पवृक्ष के निचे बैठने पर मन में बुरा ख्याल आ सकता है किन्तु भागवत कथा मे मन हमेशा शुद्ध ही रहता है।

श्री कृष्ण योग ट्रस्ट एवं कोलकाता पुष्करणा समाज द्वारा आयोजित इस आयोजन के दूसरे दिन सुबह योग सत्र में जहाँ योगाचार्य राजेश व्यास ने बारीक जानकारियों के साथ योगाभ्यास कराया तो दूसरी और भागवताचार्य जय प्रकाश शास्त्री ने कथा सत्र में आए सैंकड़ो श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

सत्संग भवन में आज से योग शिविर प्रारंभ

भागवताचार्य ने कहा कि भागवत मनुष्य के शोक, मोह और भय को दूर करती है। उन्होंने बताया कि भगवन को भूलना सबसे बड़ी विपत्ति और उनका सुमिरन ही सबसे बड़ी संपत्ति है।

भक्ति के प्रकार को बताते हुए उन्होंने कहा कि राजसिक, तामसिक और सात्विक भक्ति में सात्विक भक्ति ही केवल लाभ ही लाभ देती है।

कथा में आये मार्गदर्शक मंडल के डॉ नवरत्न भंसाली का सम्मान योगाचार्य राजेश व्यास ने अंगवस्त्र पहना कर किया।

इस आयोजन में पंडित महाविर प्रसाद शर्मा, बाबूलाल तावड़िया, विमल शर्मा, भेरुदान चांडक, सरोज शर्मा, शिव कुमार सरावगी, अजय सिंह, शैलेन लंगेल, मनोज बोहरा सहित कई लोग उपस्थित थे।

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