KMC चुनाव – भाजपा में टिकट की जंग तेज, टीएमसी के 44 पूर्व पार्षदों के नामों की चर्चा से सियासी हलचल

कोलकाता

KMC – कोलकाता नगर निगम चुनाव से पहले बंगाल भाजपा में उम्मीदवारों के चयन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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पी शीतल हर्ष

KMC

एक ओर टिकट के दावेदारों की लंबी कतार बताई जा रही है, तो दूसरी ओर TMC के 44 पूर्व पार्षदों को BJP की संभावित उम्मीदवार सूची में जगह मिलने की चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चर्चाओं के मुताबिक, उत्तर कोलकाता के 20 और दक्षिण कोलकाता के 24 पूर्व पार्षदों के नाम संभावित सूची में शामिल हो सकते हैं।

इन नामों को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास सूची जमा किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन नामों और उम्मीदवारी को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

टिकट के दावेदारों की भीड़, संगठन के सामने चयन की चुनौती – BJP के मुरलीधर सेन लेन स्थित पार्टी कार्यालय में उम्मीदवार बनने के इच्छुक लोगों के आवेदनों की भरमार की खबर है।

टिकट के लिए बढ़ती दावेदारी के बीच पार्टी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन पर सबकी नजरें टिकी हैं।

आज सुनील बंसल के नेतृत्व में प्रस्तावित बैठक को इसी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि उम्मीदवारों की सूची नवंबर के प्रथम सप्ताह में जारी हो सकती है।

दिलीप घोष का बयान और दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं का सवाल – इस बीच मंत्री दिलीप घोष के बयान ने बहस को एक और राजनीतिक आयाम दिया है।

उन्होंने कहा, “राजनीति में सब संभव है, अगर दूसरी पार्टी से लोग नहीं आते तो भाजपा इतनी बड़ी पार्टी कैसे होती?”

इस बयान के संदर्भ में भाजपा की संभावित उम्मीदवार सूची में तृणमूल के पूर्व पार्षदों के नाम आने की चर्चा को देखा जा रहा है।

सवाल यह है कि दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं को उम्मीदवार बनाने की स्थिति में पार्टी अपने पुराने कार्यकर्ताओं की दावेदारी और नए नेताओं के राजनीतिक अनुभव के बीच किस तरह संतुलन बनाएगी।

पुराने कार्यकर्ता बनाम नए चेहरे: फैसले पर टिकी निगाहें – KMC चुनाव के मद्देनजर उम्मीदवारों का चयन भाजपा के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर अहम विषय है।

टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या और दूसरी पार्टी से आए नेताओं के संभावित नामों के बीच चयन की प्रक्रिया पर निगाहें टिकी हैं।

ऐसे में पार्टी के अंतिम फैसले से यह स्पष्ट होगा कि उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय जनाधार, संगठन के प्रति योगदान और राजनीतिक अनुभव को किस तरह महत्व दिया जाता है।

फिलहाल कोलकाता की राजनीतिक निगाहें नवंबर के प्रथम सप्ताह में संभावित उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं।

सूची जारी होने के बाद ही साफ होगा कि कौन से चेहरे मैदान में उतरेंगे और किन दावेदारों को इंतजार करना पड़ेगा।

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