तृणमूल के आठ सीटिंग सांसदों का कटा टिकट

कोलकाता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसमें से आठ सीटिंग सांसदों का टिकट काट दिया गया है। जिन सांसदों का भी टिकट कटा है, वे पार्टी में काफी पहले से हाशिए पर थे।

जबकि कुछ लोगों का टिकट सिर्फ इसलिए काटा गया है, क्योंकि उनके भाजपा से संपर्क रहे हैं। इनमें से जो सबसे चर्चित नाम है वह डॉ सुुुगत बसु।‌ वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस परिवार से हैं और लीक से हटकर राजनीति करते हैं।

साल 2014 में डॉ सुगत ने जादवपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। उसके बाद साल 2017 में चर्चा में आए थे। इलाके में तृणमूल के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की थी। बाद में पता चला कि बसु अपना घर बना रहे थे और उन्होंने अपने पसंदीदा प्रमोटर से निर्माण का सामान मंगाया था।

इससे नाराज होकर इलाके के एक प्रमोटर ने उनके घर में तोड़फोड़ करवाई थी।नेताजी के परिवार और सत्तारूढ़ तृणमूल के सांसद के घर में इस तरह की घटना होने के बाद यह पूरे देश में सुर्खियां बन गई थी।

पार्टी सूत्रों का दावा है कि इस मामले को लेकर ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं ने सुगत बसु से व्यक्तिगत तौर पर बात की थी और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने को कहा था, लेकिन वे नहीं माने और उनके घर में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। संभवतः इसीलिए उनका टिकट काट दिया गया। उनकी जगह एक फिल्म अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया हैै।

दूसरे, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सबसे चर्चित सांसद है सुब्रत बक्शी। संगठन की जिम्मेदारियां बड़े पैमाने पर संभालने की वजह से उन्हें लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ाया गया है। इसके लिए उन्होंने स्वयं अपील की थी।

टिकट कटने वाले सांसदों में तीसरा सबसे चर्चित नाम इदरीश अली का है। साल 2014 में तृणमूल के टिकट पर वह सासंद बनने के बाद से ही लगातार विवादित रहे हैं। अमूमन सांप्रदायिक बयानबाजी के लिए वह सुर्खियों में छाए रहते थे। असम में एनआरसी लागू होने के बाद उन्होंने काफी विवादित बयान दिया था। इसके अलावा 2014 से लेकर 2019 तक पश्चिम बंगाल में पांच सांप्रदायिक दंगे हुए हैं और इदरीश अली ने खुलकर दंगाइयों का साथ दिया था। इसके बाद यह तय हो गया था कि उनका टिकट कट जाएगा। इसका एहसास इदरीश अली को भी था। उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए नोबेल प्राइज की मांग भी की थी, ताकि सीएम उनसे खुश रहें, लेकिन ये सारे टोटके काम नहीं आए और आखिरकार उनका भी टिकट काट दिया गया है।

चौथा जो सबसे चर्चित नाम है वह है संध्या राय का। फिल्म जगत से जुड़ी होने की वजह से संध्या राय सांसद बनने के बाद संसद से लेकर जमीनी स्तर तक काफी कम सक्रिय थीं। इलाके के लोग उनसे बेहद नाराज रहते थे, जिसके बाद उनका टिकट कटना तय था और कट गया।

पांचवां सबसे चर्चित नाम डॉक्टर उमा सोरेन का है। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से उन्होंने खुद ही टिकट नहीं लेने की अपील की थी और पार्टी ने भी उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें लोकसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया।

छठा चर्चित चेहरा तापस पाल का है। अभिनेता तापस पाल अपने पूरे कार्यकाल में सबसे विवादित सांसद रहे हैं। रोज वैली चिटफंड मामले में वह 16 महीने तक जेल में भी रहे। इसके अलावा उन्होंने विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं को काफी विवादित धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि जितने भी विपक्षी लोग हैं उन सबके घरों में लोगों को घुसाकर बहन बेटियों का बलात्कार करवा देंगे। इसके बाद पूरे देश में इसे लेकर किरकिरी हुई थी और ममता बनर्जी ने उनसे दूरी बना ली थी। उसके बाद साफ हो गया था कि उनका टिकट कट जाएगा।

सातवां चेहरा पार्थ प्रतिम रॉय का है। पार्थ प्रतिम भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। दगाबाजी की आशंका के मद्देनजर यह तय था कि उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिलेगा।
आठवां चेहरा तापस मंडल का है। मुकुल राय के भाजपा में चले जाने के बाद तापस मंडल का ममता बनर्जी के साथ अनबन रहनी लगी थी, जिससे उनका भी टिकट कट गया।

इसके पहले दो तृणमूल सांसदों– सौमित्र खान एवं अनुपम हाजरा को पार्टी से निलम्बित किया जा चुका है।

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