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‘यदि संभव हो’ का हुआ लोकार्पण

राजस्थान

सनलाइट, बीकानेर। युवा कवि आनंद मस्ताना की पहली काव्य कृति ‘यदि संभव हो’ का लोकार्पण जिला उद्योग संघ कार्यालय, रानी बाजार बीकानेर में संपन्न हुआ।

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‘यदि संभव हो’ का हुआ लोकार्पण

समारोह में शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी तथा मुख्य वक्ता राजेश विद्रोही के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।

वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि ‘यदि संभव हो’ के माध्यम से आनंद मस्ताना का हिंदी साहित्य जगत में स्वागत है।

यह कृति उनकी साहित्यिक यात्रा का सशक्त प्रारंभ है और भविष्य में उनसे और भी उत्कृष्ट सृजन की अपेक्षा की जा सकती है।

कार्यक्रम में युवा पत्रकार योगेश राजस्थानी ने कवि आनंद मस्ताना का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि वे बीकानेर की युवा साहित्यिक पीढ़ी के उभरते हुए हस्ताक्षर हैं।

मंचीय कविता, गीत और छंद लेखन में उनकी विशिष्ट पहचान बन रही है। उनकी रचनाओं में प्रेम, करुणा, मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक सरोकारों का सहज समावेश देखने को मिलता है।

‘यदि संभव हो’ उनकी प्रथम काव्य कृति है, जो उनकी साहित्यिक साधना और सृजनशीलता का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि आनंद मस्ताना की कविताएं करुणा, संवेदना और मानवीय सरोकारों की कविताएं हैं।

उनकी रचनाओं में जीवन के यथार्थ का सजीव चित्रण है, जो पाठकों के मन को गहराई से स्पर्श करता है। मुख्य अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि आनंद के गीत हिंदी की समृद्ध गीत परंपरा को आगे बढ़ाने वाले हैं।

उनके गीत परंपरा और नवीनता का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हैं तथा गीत विधा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

मुख्य वक्ता राजेश विद्रोही ने कहा कि आनंद मस्ताना की कविताएं छंद की अनुशासित कविताएं हैं। उनमें स्वाभाविकता, लयात्मकता और अभिव्यक्ति की सहजता दिखाई देती है।

यही विशेषताएं उनकी रचनाओं को पाठकों के बीच अलग पहचान दिलाती हैं। कार्यक्रम का संचालन ऋतु शर्मा ने किया। अंत में सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार श्रीराम बिस्सा ने व्यक्त किया गया।

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