सनलाइट, कोलकाता। राजस्थान परिषद द्वारा कोलकाता स्थित ओसवाल भवन में 70वें राजस्थान दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत लोकप्रिय गायक नवीन व्यास ने “जय जय राजस्थान’ गीत से मधुर स्वर के साथ की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानी समाज के लोग कोलकाता में रहते हुए भी अपनी मातृभूमि राजस्थान के प्रति अनुराग रखते हैं।
राजस्थान की सभ्यता-संस्कृति को जीवंत रखते हुए राजस्थानियों ने अपने उद्यम से बंगाल की समृद्धि में भी महत्त्वपूर्ण योग दिया है। उन्होंने कहा कि अपनी सभ्यता से कटकर तथा पूर्वजों की परम्परा से हटकर कोई भी समाज उन्नति नहीं कर सकता। इस बात को समझते हुए प्रवासी राजस्थानियों ने अपनी धरती से जुड़ाव कायम रखा है।
प्रधान अतिथि श्री वेणुगोपाल बांगड़ ने राजस्थान परिषद के कार्यक्रमों की सराहना की तथा परिषद् के प्रयत्नों से महाराणा प्रताप की भव्य कांस्य प्रतिमा की स्थापना का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कोलकाता की प्रमुख सड़क महाराणा प्रताप सरणी के साथ तथा महाराणा प्रताप उद्यान का नामकरण भी संस्था के प्रयासों से सम्पन्न हुआ, जो सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कवि अरुण प्रकाश अवस्थी की रचना “हमारा प्यारा राजस्थान’ की पंक्तियों “सिद्ध, महासंतो, कवियों से पोषित यही धरा है / यह भामाशाहों की धरती अद्भुत परंपरा है” का उल्लेख किया।
इसके बाद राज्यपाल ने “विकसित राजस्थान’ स्मारिका का लोकार्पण किया।
स्मारिका के संपादक एवं उपाध्यक्ष श्री महावीर बजाज ने राजस्थान के ओद्योगिक विकास के बारे में बताते हुए कहा कि राजस्थान अब बीमारू प्रदेश नहीं रहा है बल्कि पेट्रोल, आइ. टी., सौर ऊर्जा, खनिज एवं कृषि उत्पाद के क्षेत्र में नए सोपानों के माध्यम से द्रुत गति से विकास की ओर बढ़ रहा है।
इस समारोह में डॉ प्रेम शंकर त्रिपाठी, भंवरलाल मूंधडा, अनिल ओझा नीरद, महावीर प्रसाद रावत, अशोक कोठारी, मीनादेवी पुरोहित, कमल त्रिपाठी, रवीन्द्र राय समेत कई प्रमुख अतिथि मौजूद रहे।
