कोलकाता। पश्चिम बंगाल के लिए वर्ष 2019 कई मायनों में यादगार रहा है। यह राज्य वर्ष भर पूरे भारत में सुर्खियां बना रहा। चाहे आईपीएस राजीव कुमार और सीबीआई की लुकाछिपी हो या हाल में चल रही राज्यपाल जगदीप धनकड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच गर्मागर्मी। पुरे वर्ष बंगाल सुर्ख़ियों में ही रहा है। 2019 में सौरव गांगुली के बीसीसीआई की कमान संभालने और अभिजीत बनर्जी के नोबल पुरस्कार जीतने पर भी बंगाल सुर्ख़ियों में आया और गौरवान्वित हुआ।
आईपीएस राजीव कुमार और सीबीआई की लुकाछिपी
चिटफंड घोटाला मामले में कथित तौर पर साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार साल भर सुर्खियों में रहे। फरवरी महीने में सीबीआई की टीम ने उनके कोलकाता पुलिस आयुक्त रहते हुए ही पार्क स्ट्रीट आवास पर जाकर नोटिस देने और पूछताछ की कोशिश की थी। तब राजीव के निर्देश पर सीबीआई अधिकारियों को घसीटते हुए पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद ममता बनर्जी 3 दिनों तक कोलकाता में धरने पर बैठी थीं। हालांकि सीबीआई राजीव को गिरफ्तार नहीं कर सकी थी। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राजीव कुमार को पूछताछ में सहयोग करना होगा।
3 महीने पहले एक बार फिर सीबीआई ने राजीव की तलाश में मैराथन धर-पकड़ छापेमारी अभियान शुरू किया था। दिल्ली से सीबीआई अधिकारियों की एक टीम कोलकाता में लगातार 20 दिनों तक तलाशी अभियान चलाती रही लेकिन कुमार अंडर ग्राउंड हो गए थे।
सीबीआई दावा करती रही कि राजीव को बचाने के लिए पूरी राज्य सरकार मजबूती से खड़ी है। कुछ दिन पहले ही राज्य सरकार ने राजीव कुमार को सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक विभाग में प्रधान सचिव नियुक्त किया है।
ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति टूटना
लोकसभा चुनाव के दौरान अंतिम चरण के मतदान से पहले 14 मई को भारतीय जनता पार्टी के अखिल भारतीय अध्यक्ष अमित शाह कोलकाता में रैली करने आए थे। शाम के समय धर्मतल्ला से उनकी रैली शुरू हुई जो मानिकतला में स्वामी विवेकानंद के आवास के पास खत्म होनी थी। उसी बीच कॉलेज स्ट्रीट में विद्यासागर कॉलेज के सामने उनकी रैली में कॉलेज के अंदर से और इधर से भाजपा कर्मियों ने पथराव चालू कर दिया और इस रस्साकशी में कॉलेज परिसर में मौजूद ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ दी गई। किसने तोड़ी, यह आज तक राज है। सत्तारूढ़ पार्टी इसके लिए भाजपा पर आरोप लगाती है जबकि भाजपा का कहना है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं ने ही मूर्ति तोड़ी थी। उसके बाद राजनीति की धुरी ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति टूटना बन गई थी।
ईस्ट वेस्ट मेट्रो दुर्घटना
ईस्ट वेस्ट मेट्रो की वजह से बहूबाजार क्षेत्र में इमारतों में दरारें पड़ना और गिरने की घटना वर्ष 2019 के दौरान सबसे अधिक चर्चित रही। सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे जिन्हें अलग से होटल में रखा गया। मेट्रो प्रबंधन ने ऐसे सभी परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति भी दी।
मेट्रो के दरवाजे में उंगली फंसने की दुर्घटना
वर्ष के मध्य में मेट्रो के अंदर सजल कांजीलाल नाम के एक बुजुर्ग शख्स की भयावह दुर्घटना भी देशभर में सुर्खियों में थी। उनकी उंगली मेट्रो के दरवाजे में फंस गयी थी फिर भी तेज रफ्तार से मेट्रो चल पड़ी। स्टेशन पर घसीटते, टकराते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया था। मेट्रो सुरंग के 60 मीटर अंदर तक वह तेज रफ्तार मेट्रो के साथ खींचते चले गए थे। इसे लेकर मेट्रो के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ था।
कुत्ते के 16 बच्चों के शव बरामद
कुत्ते के 16 बच्चों के शव बरामद होने के साथ वर्ष की शुरुआत से ही एनआरएस अस्पताल सुर्खियों में छा गया था। जब उनका पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला कि उन्हें इतना मारा गया था कि उनकी हड्डियां शरीर के अंदर ही टूट गई थीं और लिवर किडनी तक फट गए थे। इस मामले में दो नर्सिंग छात्राओं को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने कुत्तों को सिर्फ इसलिए मारा था क्योंकि काम से लौटने के दौरान कुत्ते उनके आसपास मंडराने लगते थे। दोनों छात्राओं का नाम सोमा बर्मन और मौसमी मंडल है। इनके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है।
अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले
इसके बाद अस्पताल सबसे अधिक चर्चा में तब आया जब राज्य भर के चिकित्सकों ने काम बंद कर दिया था। 75 साल के मोहम्मद शाहिद नाम के बुजुर्ग की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई। मेटाडोर गाड़ी में भरकर 200 से अधिक लोग अस्पताल में पहुंचे थे और जूनियर डॉक्टरों को मारा पीटा था। इनके समर्थन में राज्य भर के चिकित्सकों ने काम बंद कर दिया था। एक सप्ताह तक राज्य में इलाज बंद रहा। कई अन्य रोगियों की मौत हो गई। ममता बनर्जी के खिलाफ भी छात्रों ने मोर्चा खोल दिया था। हालांकि बाद में सीएम और छात्रों के बीच वार्ता हुई। चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन राज्य सरकार ने दिया जिसके बाद हालात सामान्य हो गए।
रुपये की बारिश
एक और घटना जो कोलकाता की है और पूरे देश में सुर्खियों में थी। वह रुपयों की बारिश है। अंतिम महीने की शुरुआत में कोलकाता के बड़ा बाजार में स्थित बेंटिक स्ट्रीट की एक इमारत से दो हजार, 500 और 100 रुपये के नोट बरसने लगे थे। जिसके हाथ जो लगा, अपनी जेब में भरा और चलता बना। बाद में पता चला था कि डीआरआई और आयकर की छापेमारी हुई थी, जिससे बचने के लिए इस काले धन को इमारत से नीचे फेंक दिया गया था। इसका वीडियो पूरे देश में वायरल हुआ था।
जादवपुर विश्विद्यालय
जादवपुर विश्वविद्यालय में हुई एक घटना तो वैश्विक मीडिया में सुर्खी बन गई । ऐसा पहली बार हुआ जब वहां पहुंचे किसी केंद्रीय मंत्री को छात्रों ने ना केवल बंदी बनाया बल्कि उन पर हमला किया, उनके बाल पकड़कर भी घसीटा गया। घटना बाबुल सुप्रियो के साथ हुई थी। तब जगदीप धनखड़ राज्य के नए राज्यपाल बने थे और राज्यपाल अपनी गाड़ी लेकर बाबुल सुप्रियो को बचाने के लिए जा पहुंचे थे। हालांकि छात्रों ने उनकी भी गाड़ी को घेर लिया था। लेकिन जब तक वह बाबुल को अपनी गाड़ी में बैठा कर नहीं लौटे, तब तक वहीं रहे। 6 घंटे बाद बाबुल सुप्रीयो रिहा हुए थे। इसका वीडियो वायरल हुआ था जिसमें छात्र बाबुल सुप्रियो का बाल पकड़कर घसीटते नजर आए थे।
राजनीति
पश्चिम बंगाल में राजनीति के लिहाज से 2019 काफी उथल पुथल भरा रहा। इस साल लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जहां राज्य में तृणमूल के गढ़ में सेंध लगाई तो वहीं ममता बनर्जी के खेमे ने भगवा पार्टी को रोकने के लिए सर्व-समावेशी से अपना सुर बदलकर बंगाली अस्मिता पर केंद्रित कर दिया। सत्ता विरोधी लहर के सहारे भाजपा ने इस बार के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 42 में से 18 संसदीय सीटें जीतीं जबकि 2014 में पार्टी राज्य में सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई थी।
कश्मीर के कुलगाम जिले में अक्टूबर के महीने में आतंकवादियों ने राज्य के पांच प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। ये सभी मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले थे। इस बीच मई में चक्रवात ”फोनी” और नवंबर में चक्रवात ‘बुलबुल’ के प्रभाव के चलते भीषण बारिश की चपेट में आने से राज्य में कई लोग मारे गए और व्यापक क्षति हुई।
सीएए का विरोध
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन से भी बंगाल सुर्ख़ियों में बना रहा। एक और जहाँ मुख्यमंत्री पदयात्रा से विरोध करती रही तो वहीँ दूसरी और उपद्रवियों ने रेलवे को नुकसान पहुँचाने, मुर्शिदाबाद में टिकट काउंटर को जलाने, ट्रेनों को आग के हवाले करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
