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गोवा में सियासी ड्रामा, भाजपा में शामिल हुए एमजीपी के दो एमएलए

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  • उप मुख्यमंत्री सुदीन धवलिकर की कुर्सी खतरे में

गोवा में बीती आधी रात को एक बार फिर राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के दो विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इसके साथ ही गोवा विधानसभा में भाजपा के पास अब कांग्रेस के बराबर 14 विधायकों की संख्या हो गई है। इस बीच एमजीपी के सुदीन धवलिकर के उप मुख्यमंत्री पद पर आशंका के बादल घिर गए हैं। अब उनका भविष्य राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के हाथों में है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार अध्यक्ष माइकल लोबो ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उनके कार्यालय को दो विधायकों द्वारा रात करीब 1:30 बजे संपर्क किया गया था। उन विधायकों ने एक पत्र दिया, जिसे रात दो बजे तक आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया। माइकल लोबो ने कहा, “मैं इस स्तर पर पुष्टि कर सकता हूं कि वे अब आधिकारिक रूप से भाजपा के साथ हैं।”

40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में चार सीटें रिक्त हैं। सदन में मौजूदा समय में 36 सदस्य हैं। इनमें अब भाजपा के 14 सदस्य हो गए हैं। नियमानुसार दल-बदल विरोधी कानून के तहत कम से कम दो तिहाई विधायक अगर एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तभी उन्हें एक अलग दल के रूप में मान्यता दी जा सकती है और इनकी विधानसभा सदस्यता भी बनी रहती है।

उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने मीडिया से बातचीत कहा, “सुदीन धवलिकर ने निवर्तमान मुख्यमंत्री स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर से वादा किया था कि उनकी पार्टी उप चुनाव में हमारे खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगी और नितिन गडकरी के साथ बातचीत के दौरान भी उन्होंने वही दोहराया। सुदीन के भाई दीपक भाजपा गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, भले ही वे गठबंधन के साथी हैं। हम अंततः सोचते हैं कि यह अपरिहार्य था। दोनों विधायकों ने भी हमसे कहा कि वे स्थिर सरकार चाहते हैं।” उल्लेखनीय है कि 23 अप्रैल को गोवा में तीन सीटों के लिए मतदान होगा।

उधर, गोवा कांग्रेस के प्रवक्ता सुनील कवाथंकर ने देर रात जारी एक बयान में कहा, “भाजपा ने साबित कर दिया है कि यह उसके सभी सहयोगियों के लिए खतरा है। यह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूरे देश में सभी एनडीए भागीदारों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि भाजपा के साथ कोई भी साझेदारी उनकी अपनी पार्टी के अस्तित्व के लिए हानिकारक है।”

उल्लेखनीय है कि मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद भाजपा को गोवा में अपनी सरकार बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थीं। एमजीपी नेता धवलिकर भी मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। बाद में एमजीपी का समर्थन लिय़ा गया और उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया। सदन में शक्ति परीक्षण के दौरान मौजूदा प्रमोद सावंत सरकार के पक्ष में 20 सदस्यों ने मतदान किया था।

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