Narsingh Jayanti – नृसिंह जयंती की गूंज – बड़ाबाजार में 100 वर्षों की परंपरा और लिलुआ में 16वें महोत्सव की भव्य तैयारियाँ..

कोलकाता सामाजिक


Narsingh Jayanti -​ ‘भक्त के वश में हैं भगवान’ के संदेश को जीवंत करने वाले पावन पर्व नृसिंह जयंती की तैयारियाँ महानगर कोलकाता और उपनगरीय क्षेत्र लिलुआ में चरम पर हैं। .

Narsingh Jayanti

आगामी 30 अप्रैल, बृहस्पतिवार को आयोजित होने वाले इस महोत्सव के लिए भक्तों और आयोजन मंडलियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

विशेष रूप से बड़ाबाजार में 100 वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा को निभाने के लिए विभिन्न धार्मिक अखाड़ों और मंदिरों में रिहर्सल शुरू हो चुकी है।

​बड़ाबाजार में नाट्य शैली में होगा मंचन – बड़ाबाजार के विभिन्न क्षेत्रों में भगवान नृसिंह के अवतार की कथा को नाट्य शैली में प्रस्तुत किया जाता है।

भक्ति और आस्था के इस अनूठे संगम में हिरण्यकश्यप के आतंक और बालक प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रदर्शन किया जाएगा।

शास्त्रों के अनुसार, जब न दिन हो न रात—उस त्रिकाल संध्या के समय भगवान खंभ फाड़कर नृसिंह अवतार के रूप में प्रकट होंगे और अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप का वध करेंगे। तदपरांत महाआरती के साथ जयंती का समापन होगा।

​इन क्षेत्रों में रहेगी विशेष रौनक – बड़ाबाजार में मुख्य रूप से राजकटरा स्थित नृसिंह देव मंदिर, बांसतल्ला में भैरव मंदिर, ढाकापट्टी स्थित शिव मंदिर व अखाड़ा,

नीमूतल्ला में कोठारी पार्क व निम्बूतल्ला मोड़, आनंद भैरव, सिंघागढ़ मोड़, शिव ठाकुर गली स्थित रामदेव जी मंदिर, गणेश टॉकीज और पोस्ता मोड़ पर भव्य आयोजन किए जाएंगे।

Narsingh Jayanti – इन आयोजनों को सफल बनाने हेतु दीपक हर्ष, जगदीश हर्ष, राजकुमार व्यास, वरदमूर्ति व्यास, आशु पुरोहित, महेंद्र पुरोहित,

विश्वनाथ व्यास, किशन छंगाणी, डॉ. कालवाणी, भंवर महाराज, राजा रंगा, सूरज व्यास एवं उनके सहयोगी पूरी तत्परता से जुटे हुए हैं।

लिलुआ में पुष्करणा समाज की भव्य तैयारी – उधर, लिलुआ के पुष्करणा ब्रह्म बगीचा में भी पिछले 16 वर्षों से लगातार नृसिंह जयंती का आयोजन किया जा रहा है।

Narsingh Jayanti – लिलुआ के समस्त पुष्करणा परिवारों के सहयोग से होने वाले इस महोत्सव की तैयारियाँ जोर-शोर से जारी हैं।

कार्यक्रम के संयोजक पी. शीतल हर्ष ने बताया कि स्थानीय स्तर पर भक्तों के बीच इस आयोजन को लेकर गहरा लगाव है और यहाँ भी पारंपरिक विधि-विधान से भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा।

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