Supreme Court

राजीव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, गिरफ्तारी पर लगी रोक हटी

बंगाल
Please Help Save Daughter Priyanka Kumari

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिट फंड मामले में पश्चिम बंगाल के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राजीव कुमार की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दिया है। कोर्ट ने राजीव कुमार को सात दिनों का समय दिया है कि वो सक्षम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर सकें। यानि राजीव कुमार को कोर्ट सात दिनों तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेश का मतलब ये नहीं है कि सीबीआई को राजीव कुमार को गिरफ्तार करने का आदेश मिल गया है। सीबीआई कानून के मुताबिक काम करेगा। पिछले 2 मई को कोर्ट ने इस मसले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान राजीव कुमार की ओर से वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि राजीव कुमार के बारे में जो कुछ भी कहा गया है वह मनगढ़ंत है। 2015 में सरकार ने उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया और उसके बाद ऐसा क्या हुआ कि वे हिरासत में पूछताछ चाहते हैं? इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि इस मामले में कोई आपराधिक इरादा नहीं है। इसके अलावा उन्हें इस मामले में पूर्ण रूप से उत्तरदायी नहीं बनाया जा सकता है। हिरासत में पूछताछ के लिए प्रार्थना को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि सीबीआई ने 40 घंटे तक पूछताछ की है और अब उन्हें हिरासत में पूछताछ करने की आवश्यकता क्यों है? यह केवल मीडिया ट्रायल के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब सीबीआई निदेशक ने एक हलफनामा दायर किया तो केवल विसंगतियों का आरोप लगाया गया था और उस आरोप के लिए ज्यादा से ज्यादा विभागीय जांच की जा सकती है। आप कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया को दरकिनार नहीं कर सकते और हिरासत में पूछताछ नहीं कर सकते।

इंदिरा जयसिंह की दलीलें खत्म होने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं कर रहा हूं। मैं केवल कोर्ट से उनका प्रोटेक्शन आर्डर हटाने की मांग कर रहा हूं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राजीव कुमार के सारधा चिटफंट केस के सबूत नष्ट करने के सबूत दिए थे। राज्य सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीबीआई पर बीजेपी के लिए काम करने का आरोप लगाया था।

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कोर्ट को उन प्रश्न और उत्तरों को सौंपा था जो राजीव कुमार और सारधा की निदेशक देबजानी मुखर्जी से पूछे गए थे। इस पर कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा था कि क्या ये साक्ष्य केस डायरी का हिस्सा थे तो तुषार मेहता ने कहा कि हां। तुषार मेहता ने कहा था कि जांच अधिकारी के बयान सही हैं और उन पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते हैं। जस्टिस संजीव खन्ना ने तुषार मेहता से कहा था कि अपराध प्रक्रिया संहिता में हुए संशोधन के मुताबिक केस डायरी एक साथ बंधे हुए होने चाहिए, अलग-अलग पन्नों में नहीं होने चाहिए।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि यह एक राजनीतिक मामला है ताकि मामले को गर्म बनाए रखा जा सके। ये मामला कई राज्यों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। साक्ष्यों को मिटाने के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। सीबीआई कह रही है कि ये चार पांच साल पुराना मामला है। हम जांच में सहयोग कर रहे हैं। तब हिरासत में पूछताछ की क्या जरूरत है। आज के पहले साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ का आरोप कभी नहीं लगाया गया। पुलिस आयुक्त के खिलाफ पहली बार आरोप एक बीजेपी नेता ने अपने भाषण में लगाया। शिलांग में पुलिस अधिकारी से पांच दिनों में छत्तीस घंटे तक पूछताछ की गई। सिंघवी ने कहा था कि पिछले मार्च महीने में सीबीआई निदेशक ने अपने हलफनामे में कहा था कि दस्तावेजों में गड़बड़ी है लेकिन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की बात नहीं कही।

पिछले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई इस बात के सबूत दे कि राजीव सारधा चिटफंट घोटाले के सबूत नष्ट करने में शामिल रहे हैं। पिछले 17 अप्रैल को राजीव कुमार ने सीबीआई की ओर से हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया था। राजीव कुमार ने कहा था कि बीजेपी नेताओं मुकुल राय और कैलाश विजयवर्गीय के कहने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है। राजीव कुमार ने अपने दावे के समर्थन में ऑडियो क्लिप भी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।

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