Vaisakh Maas – 3 अप्रैल से शुरू हो रहा वैशाख मास 1 मई तक रहेगा। इस दौरान ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थितियां देश और विश्व पर व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं।
Vaisakh Maas
इस अवधि में 5 शुक्रवार, मंगलवारी संक्रांति है। ज्योतिषाचार्य राकेश व्यास के अनुसार 3 अप्रैल से 13 अप्रैल तक सूर्य, मंगल और शनि की युति बन रही है।
13 अप्रैल से 29 अप्रैल तक मंगल, बुध और शनि की युति प्रभावी रहेगी। इन ग्रहयोगों के कारण देश में प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, अग्निकांड, तूफान, बादल फटना आदि की घटनाओं से जन-धन हानि की संभावना है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह समय संवेदनशील माना जा रहा है। कुछ प्रदेशों में सत्ता परिवर्तन, उपद्रव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विशेष रूप से बंगाल जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव और विपक्ष के प्रभाव क्षेत्र में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति अशांत रहने की संभावना है। कई विरोधी देशों के बीच विद्रोह और तख्तापलट जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
वर्तमान में चल रहे युद्धों में शांति वार्ता के प्रयासों के बावजूद कोई ठोस परिणाम निकलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।
इसके अलावा लेखन कार्य से जुड़े लोगों, समाचार पत्रों के संपादकों, उपदेश देने वाले धर्म गुरुओं, नीतियां बनाने वाले व्यक्तियों और शिक्षकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
आर्थिक दृष्टि से बाजार में मंदी का रुख देखने को मिल सकता है, जिससे कई देशों की स्थिति उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएगी।
साथ ही किसी प्रमुख धर्म गुरु को लेकर मीडिया में व्यापक चर्चा और कोई विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
कुल मिलाकर Vaisakh Maas का यह समय कई प्रकार की उथल-पुथल और चुनौतियों से भरा रहने के संकेत दे रहा है।
