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गाजीपुर वालों ने चेन खिंच खुद रोकी विकास की रेलगाड़ी

उत्तर प्रदेश

गाजीपुर। लोकसभा चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी को मिली अपार सफलता ने एक तरफ जहां खुद उनके कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ ही समूचे देश को आश्चर्यचकित सा कर दिया है, वहीं गाजीपुर के लोगों ने अपने जनपद में तेजी से दौड़ रहे विकास की रेल गाड़ी को चैनपुलिंग कर रोक दिया। जिससे गाजीपुर ही नहीं बल्कि समूचा पूर्वांचल अवाक सा रह गया।

गुरुवार को गाजीपुर के जंगीपुर स्थित नवीन कृषि मंडी मतगणना स्थल पर मतगणना के दौरान प्रथम चरण से ही गठबंधन प्रत्याशी अफजाल अंसारी ने वर्तमान सांसद व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री संचार मंत्री मनोज सिन्हा से ऐसी बढ़त बनाई की आखिरी दौर तक अपनी बढ़त जारी रखे और लगभग सवा लाख वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली। जिनके जीत की औपचारिक घोषणा ही महज शेष रह गई।

गाजीपुर लोकसभा के इस परिणाम से मऊ, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर, चंदौली सहित गाजीपुर वालों को कोसते हुए यह कहते नहीं थक रहे थे कि गाजीपुर के लोगों ने विकास की रेल गाड़ी को रोककर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम किया है।

गौरतलब हो कि 2014 लोकसभा चुनाव में मनोज सिन्हा सांसद निर्वाचित होने के बाद केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री व संचार मंत्री स्वतंत्र प्रभार बने। जिनके द्वारा गाजीपुर के साथ ही समूचे पूर्वांचल का अभूतपूर्व विकास कराया गया। जिसमें अकेले गाजीपुर के विकास में उन्होंने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार से 20 हजार करोड़ से अधिक धन अवमुक्त कराते हुए गाजीपुर की सूरत बदलने का काम कर दिया।

इसके साथ ही चुनाव प्रचार के दौरान संवाद करते हुए उनके द्वारा लोगों को आश्वासन दिया गया था कि उनके आगामी कार्यकाल में पूर्व से डेढ़ गुना अधिक धन लाकर गाजीपुर को विकसित गाजीपुर के रूप में स्थापित कर उत्तर प्रदेश के सबसे स्मार्ट सिटी में शामिल करने का काम किया जाएगा।

उनके विकास कार्य का आलम यह था कि विकास कार्यों की बढ़ाई विरोधी भी करते नहीं थक रहे थे। पूरे चुनाव के दौरान विपक्षी पार्टियों के मंच से भी कभी उनके विकास कार्यों के प्रति सवाल नहीं खड़ा किया गया, कट्टर विरोधी भी उनके विकास कार्य को स्वीकारते हुए उन्हें गाजीपुर का सौभाग्य बताता नजर आ रहा था।

विकास से ज्यादा जातिवाद पर किया भरोसा

लेकिन इस चुनाव के परिणाम ने लोगों को यह सोचने पर विवश कर दिया क्या गाजीपुर वालों को विकास से ज्यादा जातिवाद पर भरोसा है।

तमाम लोगों ने मनोज सिन्हा की इस पराजय के लिए गाजीपुर के लोगों को दोषी ठहराते हुए कहा कि ऐसे विकासवादी नेता को नकार कर जातिवादी पर भरोसा करना गाजीपुर के लिए काफी नुकसान देह है।

गाजीपुर के लोगों द्वारा दिए गए इस परिणाम से समूचा पूर्वांचल अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है।

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