GST Council – वस्तु एवं सेवा कर परिषद की 57वीं बैठक में देश के व्यापारियों और करदाताओं के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं।
GST Council
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे बड़े सुधार के तहत अब जीएसटी अधिकारियों से मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह छीन लिया गया है।
इसके अलावा, अभियोजन (Prosecution) की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है।
माल की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सामान की जांच, रोकने या जब्त करने का अधिकार केवल सप्लायर या डेस्टिनेशन राज्य के अधिकारी को देने की सिफारिश की गई है।
किसी सामान को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ विशेष खुफिया जानकारी हो। इसके लिए कम से कम जॉइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी।
न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटा दिया गया है और जुर्माना या जेल का निर्णय अब पूरी तरह से अदालती विवेक पर निर्भर करेगा।
जहां किसी गलती के लिए अलग से कोई पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी को ₹25,000 से घटाकर ₹10,000 कर दिया गया है।
काउंसिल के फैसले के मुताबिक, अगर कोई टैक्सपेयर रिटर्न देर से दाखिल करता है, गलती करता है या भुगतान में पीछे रह जाता है, तो उससे रिकवरी, ब्याज और अनुपातिक पेनल्टी ली जाएगी। इसके अलावा सामान्य परिस्थितियों में उससे कोई अतिरिक्त कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
काउंसिल ने छोटे टैक्स मामलों को लेकर भी बड़ा फैसला किया है। अब ₹10,000 या उससे कम की रकम वाले मामलों में GST नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे।
