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Narsingh Mela – निम्बूतल्ला का नरसिंह मेला – एक शताब्दी पुरानी परंपरा

कोलकाता सामाजिक


Narsingh Mela – कोलकाता का बड़ा बाजार क्षेत्र केवल व्यापार और वाणिज्य का केंद्र नहीं है, बल्कि यह उन प्राचीन परंपराओं का संरक्षक भी है जिन्हें प्रवासियों ने अपनी जड़ों से लाकर यहाँ सींचा था।

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Narsingh Mela

इन्हीं में से एक अनूठी मिसाल है निंबुतल्ला का नरसिंह मेला, जो पिछले लगभग 100 वर्षों से अपनी पौराणिकता और जीवंतता को संजोए हुए है।

ऐतिहासिक जड़ें और धार्मिक अनुष्ठान
यह मेला निंबुतल्ला की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। मेले का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक जब्रेश्वर महादेव मंदिर है, जहाँ से भगवान नरसिंह के अवतार का प्राकट्य होता है।

कोठारी पार्क के समीप लगने वाला यह मेला भक्ति और शक्ति का एक ऐसा समागम है, जहाँ आस्था साक्षात स्वरूप धारण करती है।

‘राजा’ की गौरवशाली विरासत – ​इस मेले की सबसे विशिष्ट और कठिन परंपरा ‘राजा’ का स्वरूप है। इस परंपरा को जीवंत करने का श्रेय स्व. बमभोला हर्ष को जाता है। वे सुचित्रालाय नूतन बाजार से राजा का भव्य वेश धारण कर निकलते थे।

कठिन साधना – राजा की पोशाक और आभूषणों का कुल वजन लगभग 25 किलोग्राम होता है। कोलकाता की उमस भरी भीषण गर्मी में इस भारी पोशाक के साथ पूरे बड़ा बाजार क्षेत्र में दौड़ना किसी कठोर तपस्या से कम नहीं है।

विरासत का भार – स्व. बमभोला के पुत्र तन्नी हर्ष जब स्वयं इस भूमिका में आए, तब उन्हें अपने पिता के उस अदम्य साहस और शारीरिक क्षमता का वास्तविक बोध हुआ।

सामुदायिक सेवा और अटूट समर्पण – एक शताब्दी पुरानी इस मशाल को जलाए रखने में पूरे समुदाय का योगदान रहा है। वर्तमान में बुलाकी हर्ष पिछले 25 से अधिक वर्षों से नरसिंह का स्वरूप धारण कर रहे हैं, जो उनकी निष्ठा का प्रमाण है।

Narsingh Mela – इस आयोजन को सफल बनाने में महेंद्र पुरोहित , विश्वनाथ व्यास,चाँद रतन, राजकुमार लाखोटिया, और कन्हैयालाल मूंधड़ा (नागा) जैसे व्यक्तित्वों का मार्गदर्शन रहा है। साथ ही, समाज के अन्य कर्मठ स्तंभों ने भी अपनी निस्वार्थ सेवाएँ दी हैं।

युवा एवं सक्रिय सहभागिता: इसमें गज्जू चांडक, सुरेश पोद्दार, किशन कटारिया, और आकांक्षा के सभी सदस्य की सक्रिय भागीदारी रही है।

75 वर्षों का पड़ाव – एक स्वर्णिम इतिहास – ​कुछ वर्ष पूर्व, इस उत्सव ने अपने 75 वर्ष पूर्ण होने पर एक भव्य तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया था।

Narsingh Mela – इस आयोजन की भव्यता ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी बड़ा बाजार के निवासी अपनी जड़ों और पूर्वजों की धरोहर के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।

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