केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने नेशनल एंट्रेंस कम एलिजबिलिटी टेस्ट (NEET) PG 2025 क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी की है।
NEET PG 2025 Counselling Cut-off Lowered To 0 Percentile
NEET PG – NBEMS के इस फैसले के बाद PG मेडिकल सीटों के लिए वो छात्र भी पात्र हो जाएंगे जिनके अंक बेहद कम हैं।
नई क्वालिफाइंग कट-ऑफ के तहत नीट यूजी 2025 में माइनस 40 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी के कैंडिडेट्स को पोस्ट ग्रेजुएट्स कोर्स में एडमिशन मिल सकेंगा।
इसी तरह जनरल और EWS कैंडिडेट्स के लिए भी क्वालिफाइंग कट-ऑफ में कमी की गई है। जहां एक तरफ सरकार इसे खाली पड़ी सीटों को भरने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
13 जनवरी 2026 से पहले तक NEET-PG 2025 में क्वालिफाई करने के लिए जनरल और EWS वर्ग के लिए 50वां परसेंटाइल जरूरी था, जो 800 में से करीब 276 अंक था।
PwBD के लिए 45वां परसेंटाइल यानी करीब 255 अंक और SC, ST और OBC वर्ग के लिए 40वां परसेंटाइल था, जो लगभग 235 अंक थे।
NEET PG – यानी PG में दाखिले के लिए कम से कम 235 अंक लाने ही पड़ते थे, चाहे उम्मीदवार किसी भी वर्ग का हो।
अब NBEMS की ओर से जारी नए नोटिस के बाद कट-ऑफ को काफी नीचे कर दिया गया है। अब जनरल और EWS वर्ग के लिए कट-ऑफ 7वां परसेंटाइल कर दिया गया है, जो करीब 103 अंक बनता है।
PwBD (जनरल) के लिए यह 5वां परसेंटाइल यानी करीब 90 अंक कर दिया गया है। वहीं SC, ST और OBC वर्ग के लिए कट-ऑफ को शून्य परसेंटाइल तक घटा दिया गया है, यानी माइनस 40 अंक तक भी मान्य माने जाएंगे।
हालांकि यह साफ किया गया है कि यह बदलाव केवल काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता के लिए है, NEET-PG 2025 की रैंक में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दरअसल, डॉक्टर्स बनने के लिए दो हिस्सों में पढ़ाई होती है. सबसे पहले नीट-यूजी का एग्जाम देना होता है, उसके बाद उम्मीदवार एमबीबीएस की पढ़ाई करते हैं।
इसके बाद लोग स्पेशलाइजेशन के लिए नीट पीजी की परीक्षा देते हैं, उसमें पास होने के बाद तीन साल की पढ़ाई और होती है. ऐसे में जो माइनस-40 नंबर का जो मामला नीट पीजी एग्जाम से जुड़ा है।
