Supreme Court

सीएए पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

देश

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राहत दी है। कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पांच जजों की बड़ी बेंच सुनवाई कर सकती है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने असम और त्रिपुरा से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार हफ़्तों के बाद एक दिन तय करेंगे, जिसके बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम(CAA) के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर रोजाना सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के अलग-अलग हाईकोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर कोई भी आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर राज्यों के हाइकोर्ट में सीएए के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी।

बुधवार को सुनवाई शुरू होने से पहले कोर्ट नंबर एक में काफी भीड़ थी। भीड़ के चलते परेशानी होने पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वकील अंदर नहीं आ पा रहे हैं। शांतिपूर्वक माहौल होना चाहिए। कुछ किया जाना चाहिए। तब कपिल सिब्बल ने कहा कि ये देश की सबसे बड़ी अदालत है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर सुरक्षाकर्मी किसी को धक्का देते हैं तो दिक्कत होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं। जब केस खत्म हो जाए तो संबंधित वकीलों को बाहर निकल जाना चाहिए।

अटार्नी जनरल ने कहा कि इस तरह यह जारी नहीं रह सकता, उनको इस तरह खड़े नहीं रहना चाहिए, कोई आदेश जारी हो। अटार्नी जनरल ने कहा कि आज 144 याचिकाएं लगी हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी को कोर्ट में आने की क्या जरूरत नहीं है। सभी पक्षों के साथ बैठक करेंगे, लोग अपना सुझाव दे सकते हैं।
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि कोर्ट रूम में भीड़ की वजह से सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि ये मानवीय नही है, पुरुषों के साथ धक्का-मुक्की क्यों ?
सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने कहा कि कुल मिलाकर 144 से ज्यादा याचिकाएं हैं। हमें हलफनामा भी दाखिल करना है। अभी प्रारंभिक हलफनामा दे रहे हैं। केंद्र को 60 याचिकाएं मिली हैं। तब सिब्बल ने कहा कि पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं। इस प्रक्रिया को तीन हफ्ते के लिए टाला जा सकता है।

सिब्बल ने कहा कि इसी मुद्दे पर जल्द फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय हो। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यूपी में 30 हजार लोग चिह्नित किए गए हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं। हम एकपक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा कि ये अहम है कि क्या हमें 99 फीसदी याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए। अगर केंद्र व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई।
सिंघवी और सिब्बल ने कहा कि मामले को संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि तब तक दो महीने के लिए प्रक्रिया को मुल्तवी कर दिया जाए। तब अटार्नी जनरल ने विरोध करते हुए कहा कि ये स्टे होगा। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि ये केस संविधान पीठ को जा सकता है। हम रोक के मुद्दे पर बाद में सुनवाई करेंगे। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुझाव दिया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने पर रोक लगाई जाए, क्योंकि पहले ही इस मामले में बहुत याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं।

याचिकाएं दायर करने वालों में कांग्रेस नेता जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस के सांसद महुआ मोइत्रा, पीस पार्टी, रिहाई मंच और सिटिजन अगेंस्ट हेट नामक एनजीओ, जन अधिकार पार्टी औऱ इंडियन मुस्लिम लीग औऱ एहतेशाम हाशमी, असम के नेता डी सैकिया, सांसद अब्दुल खालिक, विधायक रुपज्योति, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, पूर्व आईएएस अधिकारी सोम सुंदर बरुआ, अमिताभ पांडे, आईएफएस देव मुखर्जी बर्मन और त्रिपुरा के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष किशोर देव बर्मन शामिल हैं। याचिका दायर करनेवालों में हर्ष मांदर, अरुणा राय, निखिल डे, इरफान हबीब और प्रभात पटनायक भी हैं। याचिकाओं में नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द करने की मांग की गई है। पीस पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि धर्म के नाम पर वर्गीकरण की संविधान इजाजत नहीं देता है। ये बिल संविधान की धारा 14 का उल्लंंघन है।
दस जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग करने वाली केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया गया था।

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