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Gujarat high court on Hindu Marriage – सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट से हिंदू शादी वैध नहीं, 7 फेरे जरूरी – गुजरात हाईकोर्ट ने..

गुजरात

Gujarat high court on Hindu Marriage – गुजरात हाई कोर्ट ने कोर्ट मैरिज से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

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Gujarat high court on Hindu Marriage

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर हिंदू विवाह में सात फेरे जैसी पारंपरिक रस्में नहीं की गईं, तो सिर्फ रजिस्ट्रेशन के आधार पर उसे वैध हिंदू विवाह नहीं माना जा सकता।

गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि ‘हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 7’ के तहत शादी की जरूरी रस्में पूरी होना अनिवार्य है।

इनमें सबसे महत्वपूर्ण रस्म ‘सप्तपदी’ मानी जाती है। यानी अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू का सात फेरे लेना।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 8 के तहत होने वाला मैरिज रजिस्ट्रेशन केवल पहले से वैध तरीके से हुई शादी का रिकॉर्ड होता है।

कोर्ट ने कहा कि यह किसी ऐसी शादी को वैध नहीं बना सकता जिसमें जरूरी धार्मिक रस्में कभी हुई ही नहीं हों।

दरअसल, यह फैसला पिछले साल नवंबर में फैमिली कोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए आया है। फैमिली कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाले व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया था।

उसने कोर्ट में दावा किया कि उसकी कभी विधिवत शादी नहीं हुई। उसके अनुसार, न कोई धार्मिक रस्म हुई और न ही दोनों कभी पति-पत्नी की तरह साथ रहे।

उसने यह भी आरोप लगाया कि शादी से जुड़े दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर धोखे से कराए गए।उन्होंने अपनी कथित शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी।

Gujarat high court on Hindu Marriage – जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आर. टी. वाच्छानी की बेंच ने साफ कहा कि सप्तपदी यानी सात फेरे जैसी जरूरी रस्में हिंदू विवाह की मूल आधार हैं।

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