राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की परपोती को दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने धोखाधड़ी के आरोप में 7 साल की सजा सुनाई है। बताया जा रहा है कि 56 वर्षीय आशीष लता रामगोबिन को डरबन कोर्ट ने 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में ये सजा सुनाई है।
बीते कल आशीष लता रामगोबिन को दोषी करार देते हुए अदालत ने ये फैसला सुनाया। आशीष लता के खिलाफ व्यापारी एसआर महाराज ने कोर्ट में याचिका दर्ज की थी। एसआर महाराज ने अपनी शिकायत में कहा कि आशीष लता ने मुनाफा देने का लालच देकर उन्हें ठगी का शिकार बनाया।
शिकायकर्ता ने कहा कि आशीष लता रामगोबिन ने न्यू अफ्रीका अलायंस फुटवेयर डिस्ट्रीब्यूटर्स के निदेशक महाराज से 5 साल पहले अगस्त 2015 में मुलाकात की थी। लता रामगोबिन कंपनी कपड़ों, लिनेन और जूते-चप्पलों का आयात, निर्माण और बिक्री करती है।
बताया जा रहा है कि महाराज की कंपनी लाभांश के आधार पर अन्य कंपनियों को वित्तीय मदद भी मुहैया कराती है। लता रामगोबिन ने एसआर महाराज से कहा था कि उन्होंने साउथ अफ्रीकन हॉस्पिटल ग्रुप नेट केयर के लिए लिनेन के तीन कंटेनर मंगाये हैं।
लता रामगोबिन के परिवार और नेट केयर के दस्तावेज के कारण महाराज ने कर्ज के लिए उनसे लिखित समझौत कर लिया। अदालत में लता ने एसआर महाराज से कहा कि उसे आयात लागत और सीमा शुल्क का भुगतान करने के लिए पैसे की दिक्कतों की कमी बताई थी।
लेकिन बाद में जब उन्हें धोखे का पता चला तो उन्होंने लता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया। आशीष लता रामगोबिन जानी-मानी मानवाधिकार इला गांधी दिवंगत मेवा रामगोविंद की बेटी हैं।
